Tuesday, September 14, 2010

सही कहा राहुल ने ...,NAREGA.

राहुल गांधी ने स्वीकारा है कि देश में हर स्तर पर भ्रष्टाचार है। उनके पिता राजीव गांधी ने भी स्वीकारा था कि दिल्ली से चला एक रुपया गांव तक जरूरतमंद के पास पहुंचते पहुंचते घिस कर 14 पैसे रह जाता है। उनकी दादी इंदिरा गांधी ने भी भ्रष्टाचार को स्वीकारा था। तो देश का सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य की देश के सबसे शक्तिशाली परिवार के सभी प्रमुख लोग भ्रष्टाचार को स्वीकारते तो हैं पर वह खत्म नहीं होता है। राहुल ने थोड़ी व्यवहारिक बात कही कि आरोप हर कोई लगाता है, पर नियंत्रण के वक्त कोई भी साथ नहीं होता है। नियंत्रण कि बात करने वाला अकेला खड़ा मिलता है। राहुल की यही बात राजस्थान में शत प्रतिशत सच साबित हो रही है। नरेगा में भ्रष्टाचार की गंगा नहीं बल्कि समुद्र बहने के आरोप लगे थे। सामाजिक अंकेक्षणों और राज्य सरकार की जांचों में भ्रष्टाचार होना साबित हो रहा था। इस पर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री भरत सिंह ने मुख्यमंत्री की सहमति से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उपाय किए थे। लेकिन जैसे उन्होंने बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया हो। उनकी ही पार्टी के  विधायक उनका विरोध करने लगे। केकड़ी के कांग्रेसी विधायक रघु शर्मा ने तो विधानसभा में ही भरत सिंह को मानसिक अवसाद ग्रस्त करार देते हुए उनके डॉक्टरी इलाज जैसी गंभीर बात तक कह दी। विधानसभा के बाहर पूरे प्रदेश के सरपंच आंदोलन पर उतारू हो गए यह किसी से छुपा नहीं है। अब खबर है कि राजस्थान सरकार नरेगा में खरीद के अधिकार फिर से ग्राम पंचायत स्तर पर देने पर विचार कर रही है। सरपंचों की मांगों पर विचार करने वाली समिति ने इसकी सिफारिश सरकार को की है। इसी अधिकार को वापस पाने के लिए प्रदेश भर के सरपंच संघर्ष कर रहे थे। यानी जिस भ्रष्टाचार को रोकने की पहल की गई थी। वो पहल अब वापस हो जाएगी। लूट लो जितना चाहो उतना। राहुल की ही बात को उसकी ही पार्टी की एक प्रदेश सरकार साबित कर रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ पहल करने वाला अकेला ही खड़ा रह जाएगा। अब इसे क्या कहा जाए,,,।